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प्रधानमंत्री मोदी ने 9 वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई

नई दिल्ली,नवसत्ताः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 11 राज्यों में 9 वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इन वंदे भारत ट्रेनों के जरिए इन सभी राज्यों में न सिर्फ यात्रा में लगने वाला समय कम होगा, बल्कि कनेक्टिविटी भी बढ़ जाएगी। पीएम मोदी ने सभी वंदे भारत ट्रेनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाई। देशभर के कई रूटों पर पहले से ही वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। ऐसे में इन ट्रेनों से वंदे भारत ट्रेनों का बेड़ा भी बड़ा होने वाला है।

रेल मंत्री ने भी लिया हिस्सा
नौ वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें 11 राज्यों में चलने वाली हैं। इन राज्यों में राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, ओडिशा, झारखंड और गुजरात शामिल हैं। वंदे भारत ट्रेनों के जरिए इन राज्यों में कनेक्टिविटी में सुधार होगा। पीएम मोदी ने इस मौके पर लोगों को संबोधित भी किया। वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत पर इन 11 राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री समेत अन्य आला-अधिकारी भी मौजूद रहे। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इसमें हिस्सा लिया।

लॉन्च की जानेवाली 9 नई वंदे भारत ट्रेनें
1. कासरागोड – तिरुवनंतपुरम (केरल)
2. जयपुर – उदयपुर (राजस्थान)
3. विजयवाड़ा- रेनीगुंटा- चेन्नई (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु)
4. तिरुनेलवेली – मदुरै- चेन्नई (तमिलनाडु)
5. जामनगर-अहमदाबाद (गुजरात)
6. रांची – हावड़ा (झारखंड और पश्चिम बंगाल)
7. हैदराबाद-बेंगलुरु (तेलंगाना और कर्नाटक)
8. राउरकेला-पुरी (ओडिशा)
9. पटना-हावड़ा (बिहार और पश्चिम बंगाल)

देश का हर क्षेत्र वंदे भारत से जुड़ेगाः पीएम मोदी
अब वह दिन दूर नहीं जब देश का हर क्षेत्र वंदे भारत से जुड़ जाएगा। ये ट्रेन उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो ट्रेन सफर का समय कम से कम रखना चाहते हें। ये ट्रेन उन लोगों की जरूरत बन गई है, जो एक शहर से दूसरे शहर जाकर एक ही दिन में काम पूरा करके लौटना चाहते हैं। रेलवे स्टेशन कोई भी हो, उसका स्थापना दिवस यानी जन्मदिवस होता है। मुंबई, पुणे, चेन्नई समेत कई शहरों में रेलवे स्टेशनों के जन्मदिवस मनाए जा रहे हैं। इस परंपरा का और विस्तार किया जाएगा। इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जाएगा।

पहले की सरकारों में रेल मंत्रालय किसे मिलेगा इसकी सबसे ज्यादा चर्चा होती थी। माना जाता था कि रेल मंत्रालय जिस राज्य से होगा वहीं पर ज्यादा ट्रेन चलेंगीं। ऐसा भी होता था कि नई ट्रेनों का ऐलान तो हो जाता था, लेकिन वे ट्रेनें कभी चल नहीं पाती थीं। इस परंपरा ने देश का बहुत नुकसान किया है। अब हम किसी राज्य को पीछे छोड़ने की गलती नहीं दोहरा सकते। हमें ‘सबका साथ सबका विकास’ की सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।

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