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बदला प्रचार का तरीका,दिख रहा डोर टू डोर कैंपेन का असर

door to door campaign

लखनऊ,नवसत्ता: चुनाव प्रचार के तरीकों में पिछले कुछ वर्षों में बड़े बदलाव आए हैं. पहले की तरह अब शोर-शराबा, दीवारों पर नारे लिखना, बैनर झंडों का इस्तेमाल, लाउड्स्पीकर लगा कर प्रत्याशी के पक्ष में नारेबाजी आदि बहुत कम हो गया है और लगभग खत्म ही हो चली है. चुनाव आयोग के नियमों के अलावा पिछले दो सालों से कोविड के खतरे को देखते हुए भी ज्यादा लोगों की भीड़ एकट्ठा करने पर प्रतिबंध है.

ऐसे में चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दलों के पास घर घर जाकर मतदाताओं से मिलना एक प्रभावशाली विकल्प है. जहां एक ओर कुछ राजनीतिक नेता डिजिटल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से अपनी छवि प्रस्तुत करते हैं, वहीं काँग्रेस पार्टी द्वारा घर-घर जाकर प्रचार करने के तरीके पर जोर दिया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव के लिए सभी दलों के प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है. पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा दिया गया नारा “लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ” महिलाओं और लड़कियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो चुका है. उन्होंने पार्टी का महिलाओं के लिए संकल्प पत्र भी जारी किया, जिसकी बहुत सराहना की गई.

उनके अलावा कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों के दिग्गज भी यूपी का रुख कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ के मुख्य मंत्री भूपेश बघेल का उत्तर प्रदेश में प्रचार के लिए उतरना उसी रणनीति का हिस्सा है. यह भी उल्लेखनीय है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही बघेल उत्तर प्रदेश के कई राजनीतिक दौर कर चुके हैं.

इसी कड़ी में रविवार को भूपेश बघेल नोएडा में कांग्रेस प्रत्याशी पंखुड़ी पाठक के प्रचार के लिए पहुंचे. इस दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लोगों के घर-घर जाकर उनसे कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने की अपील की. उन्होंने न केवल लोगों से उनका हालचाल पूछा, बल्कि लोगों को कांग्रेस के वादे भी बताए. उनका कहना था कि “दूसरे लोग या तो जाति के नाम पर राजनीति कर रहे हैं या धर्म की राजनीति कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के अलावा कोई आम लोगों की बात नहीं कर रहा है. युवाओं, किसानों, महिलाओं से लेकर पिछड़े समुदायों तक हम सबको साथ लेकर चल रहे हैं.”

उन्होंने लोगों को यह भी याद दिलाया कि अब कई दल गठबंधन करके जीत हासिल करने की योजना बना रहे हैं, जबकि जो गठबंधन पिछली बार बने थे वह कैसे गिरे हैं वह सबको पता है.

उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस ने इस बार टिकट बंटवारे में 40 फीसदी महिला भागीदारी को सुनिश्चित करने का फैसला लिया है. पार्टी के प्रत्याशियों की पहली सूची में 40 प्रतिशत महिलाओं के नाम होने से महिलाओं में काँग्रेस के प्रति विश्वास बढ़ा है. आने वाले दिनों में काँग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता भी उत्तर प्रदेश में प्रचार को आगे बढ़ाएंगे.

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