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भुखमरी से बदहाल भारत, 116 देशों की लिस्ट में 101वें नंबर पर

BHUKHMARI SE BADHAAL BHARAT

नई दिल्ली,नवसत्ताः आज विश्व खाद्य दिवस है। ऐसे में ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 की जारी लिस्ट मोदी सरकार को आइना दिखाने वाली है। इस लिस्ट के अनुसार भारत में भुखमरी की स्थिति पहले से भी ज्यादा चिंताजनक हो गई है। भुखमरी से बदहाल भारत (BHUKHMARI SE BADHAAL BHARAT) -116 देशों की लिस्ट में भारत 101वें नंबर पर आ गया है। इसके पहले 2020 की लिस्ट में भारत 94 वें नंबर पर था। ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत को “अलार्मिंग” हंगर कैटेगरी रखा गया है। भारत भुखमरी के मामले में पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से भी पिछड़ गया है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी की संस्था वेल्ट हंगर हिल्फ की ओर मिल कर तैयार किया गया है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। सिब्बल ने सरकार के गरीबी मिटाने, भूख मिटाने और भारत को ग्लोबल पावर बनाने के दावों को लेकर सवाल किया है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट में भारत को “अलार्मिंग” कैटेगरी में रखा गया

कुल 18 देश हैं टॉप पर वेबसाइट के मुताबिक, चीन, कुवैत और ब्राजील समेत कुल 18 देशों ने इस इंडेक्स में टॉप रैंक हासिल किया है। इन देशों का ळभ्प् स्कोर पांच से भी कम है। 116 देशों की इस लिस्ट में भारत से पीछे केवल 15 देश हैं। ये 15 देश हैं , पापुआ न्यू गिनी (102), अफगानिस्तान (103), नाइजीरिया (103), कांगो (105), मोजाम्बिक (106), सिएरा लियोन (106), तिमोर-लेस्ते (108), हैती (109) ), लाइबेरिया (110), मेडागास्कर (111), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (112), चाड (113), मध्य अफ्रीकी गणराज्य (114), यमन (115) और सोमालिया (116) खराब रैंकिंग पर केंद्र सरकार ने उठाए सवाल, कहा अवैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई है रिपोर्ट उधर केंद्र सरकार ने कहा है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग का इस कदर नीचे आना चैंकाने वाला है। सरकार ने कहा है कि इसे बनाने का तरीका अवैज्ञानिक है।

BHUKHMARI SE BADHAAL BHARAT (भुखमरी से बदहाल भारत)- इस रैंकिंग पर प्रतिक्रिया देते हुए महिला और बाल विकास मंत्रालय ने कहा कि यह हैरान करने वाला है कि कुपोषण की शिकार आबादी के अनुपात पर जो अनुमान दिए हैं, उसी की बुनियाद पर ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2021 में भारत की रैंक घटा दी गई। जबकि यह अनुमान जमीनी हकीकत और तथ्यों से काफी दूर है। इसे बनाने के तरीके में गंभीर दिक्कतें दिख रही हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स आयरलैंड की एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मनी की संस्था वेल्ट हंगर हिल्फ की ओर मिल कर तैयार किया गया है। मंत्रालय के मुताबिक भुखमरी को मापने का तरीका निहायत है अवैज्ञानिक है। उन्होंने अपना आकलन “चार सवालों” पर कराए ओपनियन पोल के नतीजों के आधार पर तैयार किया है।

GARIBI AND MODI GOVERNMENT


GHI INDEX-INDIA'S POSITIONED WORSHENED

देश में हर साल 40 फीसदी खाना होता है खराब, 20 करोड़ रोज सोते हैं भूखे

एक ओर जहां भारत वैश्विक भुखमरी सूचकांक के 116 देशों की सूची में 91वें स्थान से फिसलकर 101वें पायदान पर पहुंच गया है। वहीं दूसरह ओर सरकार के नाकारापन के कारण देश में हर साल पैदा होने वाला 40 फीसदी खाद्य पदार्थ रखरखाव या आपूर्ति की अव्यवस्था के कारण खराब हो जाता है। आज विश्व खाद्य दिवस है। संयुक्त राष्ट्र की संस्था फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) की रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में 69 करोड़ से अधिक लोग हर दिन भूखे पेट सोते हैं। भारत में खाने के अभाव में हर दिन भूखे पेट सोने वाले लोगों की संख्या 20 करोड़ से अधिक है।

भुखमरी खत्म हो सकती है

एफएओ का कहना है कि दुनियाभर में 14 फीसदी खाद्य पदार्थ इसलिए खराब हो जाता है क्योंकि उसे काटने, रखने और आपूर्ति करने की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसी तरह 17 फीसदी खाद्य पदार्थ उपभोक्ता स्तर पर खराब होता है। अगर इस नुकसान को रोक दिया जाए तो दुनिया की एक बड़ी आबादी जो भूखे सोने को मजबूर है उसका पेट भरा जा सकता है। कृषि क्षेत्र में 100 करोड़ रोजगार दुनियाभर में कृषि और खाद्य पदार्थों से जुड़े क्षेत्रों में करीब 100 करोड़ लोग काम करते हैं। ये दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र हैं जहां सबसे अधिक लोगों के पास नौकरी है।

भारत में खाने की बर्बादी

GHI INDEX: भारत में करोड़ों लोग भूखे सोते हैं तो एक बड़ी आबादी को पौष्टिक खाना नहीं मिल पाता है। वो भी तब जब देश में हर साल प्रति व्यक्ति पर 50 किलो खाना बर्बाद होता है। भारत में कुल खाने की बर्बादी का आकलन करेंगे तो हर साल 68,760,163 टन खाना बर्बाद होता है।

खाना ही स्वस्थ व खुशहाल दुनिया की नींव

वर्ल्ड फूड डे सिर्फ खाने का महत्त्व याद दिलाने का दिन नहीं है। पौष्टिक खाना ही स्वस्थ और खुशहाल दुनिया की नींव है। दुनियाभर में खाद्य सुरक्षा पर काम करने की जरूरत है। कोरोना महामारी के बीच दुनियाभर में 14 करोड़ से अधिक लोग खाने से वंचित रहे हैं। ये हालत तब है जब दुनियाभर में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थों की बर्बादी होती है। अगर उत्पादन कम होने लगे तो भुखमरी दुनिया के लिए नई चुनौती बनेगी।

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