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गांव वालों के लिए पानी भी नहीं रहा मुफ्त, ढाई हजार तक आएगा बिल

वाह क्या मिशन है नाम है जल जीवन पर काम गांव वालों को पानी बेंचने का
शहरों से भी मंहगा होगा गांव का पानी,हर घर कनेक्शन पर लगेगा मीटर

संजय श्रीवास्तव,
लखनऊ,नवसत्ताःजल जीवन मिशन वैसे तो गांवों में पाइप के जरिए पानी पिलाने की योजना है, इसका प्रचार भी हर घर नल और हर घर जल देने का किया गया। पर इसके इरादे नेक नहीं लगते, लखनऊ जैसे महानगर में जल संस्थान और छावनी परिषद क्षेत्र में रहने वाले जहां साल के 1000-1200 रूपए ही पानी के लिए खर्च करते हैं वहीं गांव वालों को नल से पानी के लिए 1800-2500 रुपये तक साल के देने होंगे। यही नहीं पानी के मीटर भी लगेंगे वो चले ना चले लेकिन आपके पैसों का मीटर जरूर चलेगा।

जी हां 1 लाख 20 हजार करोड़ खर्च करके सरकार गांव वालों से कई लाख हजार करोड़ वसूलने की तैयारी में है। इसकी पुष्टि शासनादेशों और जमीन पर बनने वाले एस्टीमेटों से साफ हो जाती है। एक तरफ जहां 31 अक्टूबर 2014 को जारी ग्राम्य विकास विभाग के शासनादेश का हवाला देकर साफ कहा गया है कि पाइप पेयजल योजना में 50 रुपये प्रतिमाह प्रति परिवार से वसूला जाएगा, बाद में इस राशि को बढ़ाया भी जा सकता है।

इसी शासनादेश में गांवों को बल्क मीटर भी मुहैया कराने की बात कही गई है मतलब हर घर को मिलने वाला पानी मीटर के हिसाब से ही पड़ेगा और जितना पानी खर्च होगा उतना पैसा उस परिवार को देना होगा। पर अभी तो इस योजना में जो पानी मिलने वाला है उसके लिए 2022 तक इंतजार करना होगा, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन की देखरेख में गांव सभाओं के लिए जो एस्टीमेट बन रहे हैं अगर उन पर गौर करें तो कानपुर के रेट अलग हैं और कन्नौज के अलग, कन्नौज जिले में त्रिमुख ग्राम पंचायत का जो एस्टीमेट बना है उसके मुताबिक तो साल 2022 से 2036 तक के लिए गांव के प्रति परिवार को 2500 रुपये हर साल देने होंगे।

मतलब 208 रूपए 30 पैसे हर महीने पड़ेंगे। कानपुर में 150 रुपये महीने का एस्टीमेट बना है। अब जरा गौर करें तो लखनऊ के एनेक्सी भवन के आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को पानी और सीवर दोनों के लिए लगभग 2000 रुपये चुकाने पड़ते हैं इसी तरह कैंट इलाकों के लोगों को पानी और सीवर के 1800 रूपये देने पड़ते हैं मतलब गांवों में दिया जाने वाला पानी शहरों की तुलना में मंहगा होगा। अब सवाल ये कि कच्चे पक्के मकानों के अलावा झोपड़ियों में रहने वाले हमारे गांववासी क्या पानी की कीमत चुका पाएंगे।

 

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