डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दोनों हाथों में लड्डू,बढ़ेगा कद
नीरज श्रीवास्तव
लखनऊ, नवसत्ताः बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित होने वाले हैं। ये नतीजे न केवल बिहार की सत्ता की दिशा तय करेंगे, बल्कि पड़ोसी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी निर्णायक प्रभाव डालेंगे। हिंदी पट्टी के इन दो प्रमुख राज्यों की साझा सीमाएं, जातिगत समीकरण, प्रवासी मजदूरों की बड़ी आबादी और राष्ट्रीय दलों की रणनीति के कारण बिहार के परिणाम यूपी के राजनीतिक समीकरणों को हिला सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एनडीए मजबूत हुई, तो योगी आदित्यनाथ सरकार को मजबूती मिलेगी, जबकि महागठबंधन की जीत विपक्ष को 2027 के यूपी चुनावों के लिए गति देगी। एग्जिट पोल्स में एनडीए को स्पष्ट बहुमत की भविष्यवाणी की गई है, हालांकि पूर्व में ऐसे पोल कई बार गलत साबिक हुए हैं। यहां एक बात बड़ी रोचक है कि चाहे हार हो या जीत यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का दोनों ही स्थितियों में कद बढ़ना तय है, यानी उनके दोनों हाथों में लड्डू है।
बिहार में दो चरणों (6 और 11 नवंबर) में कुल 243 सीटों पर 64.66 फीसदी और 68.52 फीसदी मतदान दर्ज हुआ, जो पिछले 30 वर्षों का रिकॉर्ड है। यह उच्च मतदान एनडीए के पक्ष में माना जा रहा है, जैसा कि 2017 के यूपी चुनावों में 61.11 फीसदी वोटिंग के साथ भाजपा की जीत हुई थी। आठ प्रमुख एजेंसियों के पोल ऑफ पोल्स में एनडीए को 147 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के 122 से कहीं अधिक है। दो एजेंसियों ने महागठबंधन को 130 से अधिक सीटे मिलने का अनुमान जताया है। हालांकि किस गठबंधन को जीत मिलेगी यह शुक्रवार को ही तय होगा।
बिहार चुनावों के प्रमुख मुद्दे,बेरोजगारी, प्रवासन, जातिगत जनगणना, विकास और कानून-व्यवस्था यूपी की राजनीति से गहराई से जुड़े हैं। बिहार से यूपी में लाखों प्रवासी मजदूर काम करते हैं, खासकर पूर्वांचल के जिलों जैसे गोरखपुर, आजमगढ़, बहराइच और बलिया में। यदि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार बनी, तो डबल इंजन मॉडल मजबूत होगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार के दौरान अररिया और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में रैलियां कीं, जहां उन्होंने आरजेडी-कांग्रेस पर जंगल राज का आरोप लगाया।

ओवैसी फैक्टर भी चर्चा में है, जो यूपी-बिहार में वोट कटवा बन रहा है। कुल मिलाकर, बिहार के परिणाम यूपी की राजनीति को नया रंग देंगे। एनडीए की जीत डबल इंजन को गति देगी, जबकि महागठबंधन की सफलता विपक्ष को हौसला। 14 नवंबर का इंतजार समूची हिंदी पट्टी कर रही है।

