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अडानी की कहानीःहम तो डूबेंगे सनम,तुमको भी ले डूबेंगे!

सार्वजनिक बैंको,एलआईसी व आम निवेशकों को बीते माह हुआ तगड़ा घाटा
नीरज श्रीवास्तव
लखनऊ,नवसत्ता: अमेरिकी शार्टसेलर कंपनी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडानी ग्रुप शेयरों में गिरावट को जो सिलसिला 24 जनवरी के बाद से शुरू हुआ था, वह 1 महीने बाद भी जारी है। इसी के साथ उन सरकारी कम्पनियों व बैंको के भी शेयर भी बीते एक माह में तेजी से गिर रहे हैं जिन्होंने या तो अडानी समूह में पैसा लगाया है या उसे कर्ज दिया है। यही नहीं देश के करोड़ों आम निवेशकों के भी लाखों करोड़ रूपये डूब गये।
शेल कम्पनियों जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अडानी समूह का मार्केट कैप बीते एक माह में लगभग 12 लाख करोड़ घट गया है और गौतम अडानी दुनिया के अमीरों की सूची में तीसरे नम्बर से लुढ़ककर 29वें नम्बर पर आ गये हैं। ऐसा नहीं है कि केवल अडानी समूह का मार्केट कैप ही घटा है। समूह को कर्ज देने वाली सरकारी कम्पनियों का भी बैंड बज रहा है। आइये समझते हैं कि सार्वजनिक बैंको और एलआईसी को केवल एक महीने में कितना नुकसान हुआ है।स्टेट बैंक आफ इंडिया

देश के सबसे बड़े सार्वजनिक बैक स्टेट बैंक आफ इंडिया यानी एसबीआई ने अडानी समूह में सर्वाधिक पैसा लगा रखा है। देश के बैंको ने अडानी समूह को लगभग 80 हजार करोड़ का कर्ज दे रखा है। हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद जब अडानी के शेयर गिरने लगे तब एसबीआई चेयरमैन दिनेश खारा ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनके बैंक ने अडानी समूह को करीब 27,000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया हुआ है। यह बैंक की तरफ से दिये गए कुल लोन का 0.88 प्रतिशत है। और इस ग्रुप को कोई भी लोन शेयरों के एवज में नहीं दिया है। हमने ऐसा कुछ नहीं किया है जो हमें चिंता में डाल सके। हालांकि शेयर बाजार ने उनके बयान पर भरोसा नहीं जताया और बीते एक माह का चार्ट देखें तो एसबीआई के शेयरों में साढ़े प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। गत 24 जरवरी को स्टेट बैंक को शेयर रू 594.35 था जो कि शुक्रवार 24 फरवरी को बाजार बंद होते समय लुढ़क कर 521.50 हो गया है। जाहिर तौर पर इससे एसबीआई में निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों को केवल एक माह में ही जबरदस्त घाटा हुआ है।
बैंक ऑफ बड़ौदा

अडानी समूह के ऊपर बैंक ऑफ बड़ौदा का 5500 करोड़ रुपये का कर्ज है। अडानी समूह में इतनी तेज गिरावट के बावजूद बैंक प्रबंधन बेफ्रिक नजर आ रहा है। हाल ही में बैंक के सीईओ और एमडी संजीव चड्ढा ने कहा कि वह अडानी ग्रुप के शेयरों में आई गिरावट से कतई चिंतित नहीं हैं। बैंक ग्रुप को अतिरिक्त लोन देने को तैयार है बशर्ते वह बैंक के अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स को पूरा करे। बैंक अडानी ग्रुप को मुंबई की धारावी झुग्गी वाले प्रोजेक्ट के लिए भी लोन दे सकता है। वडोदरा मुख्यालय वाले बैंक ऑफ बड़ौदा का बयान ऐसे समय आया है जब अडानी ग्रुप के शेयरों में हाल में काफी गिरावट आई है। इसका सीधा असर अब बैंक आफ बड़ौदा के शेयर पर पड़ता दिख रहा है। 24 जनवरी को बैंक का शेयर रू 177.95 था जो कि 24 फरवरी को घटकर 154.80 रह गया है।

पंजाब नेशनल बैंक

पंजाब नेशनल बैंक ने अडानी समूह को करीब 7000 करोड़ रुपए का कर्ज दे रखा है, जिसमें से 2,500 करोड़ रुपए एयरपोर्ट बिजनेस से संबंधित हैं।  पंजाब नेशनल बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर अतुल कुमार गोयल के मुताबिक हमने जो भी कर्ज दिया है वह कैश में है। कुल कर्ज में 42 करोड़ रुपए का ही निवेश और बाकी कर्ज है। शेयर बाजार में इस बैंक की भी पिटाई हो रही है। 24 जनवरी को शेयर का प्राइज रू 55.50 था जो कि 24 फरवरी को रू 47.50 रह  गया,यानी एक माह में लगभग 12 फीसद की कमी आई है।

लाइफ इंश्योरेंस कंपनी

अडानी समूह के गिरते शेयरों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में देश की सबसे बड़ी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी
यानी एलआईसी है। एलआईसी की ओर से बयान आया था कि हमने अडानी समूह में लगभग 30 हजार करोड़ लगाया था जिसकी वैल्यू दिसम्बर माह में लगभग 72 हजार करोड़ तक पहंुच गई थी। हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद भी ये वैल्यू तेजी से घटी परन्तु तब भी एलआईसी प्रबंधन का तर्क था कि वह अब भी अपने मूल धन से अधिक करोड़ों के फायदे में है। हलांकि उसका तर्क ज्यादा दिन नहीं टिका। शुक्रवार को आयी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एलआईसी का पैसा घटकर अब 27 हजार करोड़ के करीब बची है यानी मूल धन में से तीन हजार करोड़ से अधिक की कमी आयी है। अगर 50 दिन की तुलना की जाए तो एलआईसी के अडानी समूह में निवेश की पूंजी में लगभग 50 हजार करोड़ की कमी आयी है। इतने बड़े झटके के बावजूद एलआईसी की ओर से अभी तक निवेश घटाने को लेकर कोई बयान नहीं आया है। इसका सीध असर अब उसके शेयर पर भी पड़ता नजर आ रहा है। बीते 24 जनवरी को एलआईसी के शेयर का भाव रू 702.10 था,जो कि 24 फरवरी आते आते घटकर रू 584.70 रह गया है। यानी एक माह में ही उसके शेयर लगभग 17 प्रतिशत कम हो गये।
इन सार्वजनिक बैंको व एलआईसी का यह हाल केवल एक महीने में हुआ है और अभी गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। कमोबेश यही हाल उन सभी बैंको का है जिसने अडानी समूह को कर्ज दिया है या उनमें निवेश किया है। अब अगर इसमें ब्याज जोड़ लिया जाय तो यह नुकसान और ज्यादा हो जाएगा। इन बैंको और एलआईसी के अलावा देश के करोड़ों आम निवेशकों को भी बीते एक माह में तगड़ी चपत लगी है जिन्होंने अडानी समूह के शेयर ले रखे हैं।

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