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फर्जीवाड़ाः सेना की पुरानी गाड़ियों का किया गया नया पंजीकरण

संजय श्रीवास्तव

  • पूरे प्रदेश में 3000 पुरानी गाड़ियों का नया पंजीकरण
  • फर्जी तरीके से बनवाया गय़ा फार्म – 21
  • BS-2 और BS-3 मॉडल की गाड़ियों को BS-4 मॉडल में किया गया दर्ज
  • पुरानी गाड़ियों का फिटनेस न होने से राजस्व की भी हानि
  • मामले की शिकायत पहुंची मुख्यमंत्री कार्यालय
  • एसीएस परिवहन को सौंपी गई है जांच                                                                                                                                   

नवसत्ता,लखनऊः आप यूपी में रहते हैं और अगर आपकी गाड़ी बीएस-2 या बीएस-3 मॉडल है तो चिंता की कोई बात नहीं आपन यूपी परिवहन विभाग है ना जो पैसे लेकर फर्जी तरीके से आपके वाहन को बीएस-4 मॉडल में बदल देगा और यही नहीं वो आपके 10-15 साल हो चुके पुराने वाहन को फिर से 15 साल के लिए नया कर देगा। जी हां वैसे तो यूपी का परिवहन विभाग अपने नये नये और काले कारनामों को लेकर आए दिन ही सुर्खियों में रहता है, पर इस बार जो मामला सामने आया है उसे जानकर आपको हैरत भी होगी और सुकून भी मिलेगा, क्योंकि फर्जी तरीके से पुरानी गाड़ियों को नई गाड़ी के रूप में पंजीकृत करने का यूपी परिवहन विभाग को महारत जो हासिल है।

मुख्यमंत्री कार्यालय से हुआ खुलासा
मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई एक शिकायत में इस बात का खुलासा हुआ कि कैसे फर्जी तरीके से फार्म -21 को बनाकर सेना द्वारा बेची गई पुरानी गाड़ियों को नई गाड़ी के रूप में पंजीकृत कर दिया गया। शिकायत के मुताबिक पूरे प्रदेश में करीब 3000 पुरानी गाड़ियों का नई गाड़ियों के रूप में पंजीकरण किया गया। लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले में ही परिवहन विभाग ने सेना द्वारा बेची गई 3 पुरानी गाड़ियों को नई गाड़ी के रूप में पंजीकृत किया गया। ऐसा करने से इन पुरानी गाड़ियों का फिटनेस नहीं हो पाता जिससे विभाग को तो राजस्व का चूना लगता ही है साथ ही ऐसी पुरानी गाड़ियों का बिना फिटनेस नई गाड़ियों के रूप में सड़कों पर दौड़ना दुर्घटना को भी दावत देता रहता है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से की गई अपनी शिकायत में बताया है कि पूरे प्रदेश में लगभग 3000/ गाड़ियां विभिन्न जनपदों में गलत तरीके से पंजीकृत होने के कारण आज की तिथि में नई गाड़ियों की तरह नई तारीख में पंजीकृत होकर चल रही हैं।

सेना द्वारा बेची गयी है गांड़ियां
ये गाड़ियां सेना द्वारा बेची गई हैं और इन्हें बेचने में फार्म- 21 नहीं जारी किया गया है। क्रेता ने फर्जी तरीके से फार्म-21 बनवाकर पुन: गाड़ी को बेच दिया है। जो वाहन पुन: बेचे गए उन्हें पुन:वाहन के रूप में बेचा नहीं जा सकता था, क्योंकि उनके पास वैध प्रपत्र नहीं थे, और वाहन पुराने हो चुके थे, परंतु विभिन्न जनपदों में बिना वैध प्रपत्रों के गलत तरीके से नई तिथि में पंजीकृत कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने उदाहरण के रूप में बताया कि कैसे तत्कालीन ARTO बाराबंकी पंकज सिंह ने 3 वाहनों को जो सन 2001 से 2005 तक के बीच के मॉडल हैं को 2019 के बाद के मॉडलों में दर्ज कर दिया और अब ये वाहन नई गाड़ी के रूप में सड़क पर दौड़ रहे हैं, ऐसा करने से इन वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना सर्वाधिक है और इन वाहनों की फिटनेस न होने से राजस्व की भारी हानि भी हो रही है, इसके अतिरिक्त ये वाहन BS-2 या BS-3 मॉडल हैं और उन्हें BS4 मॉडल में दर्ज करके उनकी आयु सीमा 15 वर्ष और बढ़ा दी गई है।

कई अधिकारी जांच के घेरे में
शिकायतकर्ता ने ये भी बताया कि उपरोक्त प्रकरण की जांच RTO अयोध्या संजय सिंह द्वारा की गई और उन्होंने आउट ऑफ द वे जाकर ARTO बाराबंकी पंकज सिंह को बचाने का प्रयास किया जिससे यह सिद्ध होता है कि इस प्रकरण में RTO अयोध्या की भी संलिप्तता है। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को पूरे मामले से अवगत कराते हुए एआरटीओ बाराबंकी पंकज सिंह और RTO अयोध्या संजय सिंह के विरुद्ध इस प्रकरण की जांच कराकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

अपर मुख्य सचिव परिवहन मांगी रिपोर्ट
उधर इस मामले पर मुख्यमंत्री कार्यालय से शिकायत पत्र को संलग्न करते हुए परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव से पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया है। मामले को लेकर आरोपी आरटीओ अयोध्या संजय सिंह ने फोन पर बताया कि ये पूरे प्रदेश का मामला है और जो कंप्यूटर की गलती से हो गया है, उन्होंने बड़े आत्म विश्वास से कहा कि ये कोई गलत कार्य नहीं किया गया है इससे विभाग के सभी आला अफसर अवगत है।

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