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दिल्ली: उपराज्यपाल सक्सेना का बड़ा एक्शन, आबकारी विभाग के 11 अधिकारियों को किया सस्पेंड

नई दिल्ली,नवसत्ता: दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने नई एक्साइज पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने में लापरवाही बरतने और नियमों की अनदेखी करने के आरोप में पूर्व आबकारी आयुक्त आरव गोपीकृष्ण और पूर्व डिप्टी कमिश्नर आनंद तिवारी सहित 11 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

एलजी ने यह आदेश संबंधित अधिकारियों की ओर से आबकारी नीति के कार्यान्वयन में गंभीर चूक के मद्देनजर लिया है. इसमें टेंडर देने में अनियमितताएं पाने जाने और चुनिंदा विक्रेताओं को पोस्ट टेंडर लाभ प्रदान करना शामिल है.

एलजी कार्यालय के अनुसार उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के तत्कालीन आबकारी आयुक्त, आईएएस अधिकारी आरव गोपी कृष्ण और दानिक्स अधिकारी आनंद कुमार तिवारी, उप आबकारी आयुक्त के खिलाफ प्रमुख अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने को मंजूरी दे दी है.

दरअसल दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के बीच खींचतान चल रही थी. यह कार्यवाही दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की प्रेस कांफ्रेस के बाद की गयी है.

मनीष सिसोदिया ने की सीबीआई जांच की मांग

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने नई शराब नीति को लेकर सीबीआई जांच की बात कही थी. मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि नई शराब नीति को रद्द करने का फैसला उपराज्यपाल ने बिना कैबिनेट से बात किए लिया. इससे दिल्ली सरकार को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो गया. मनीष सिसोदिया ने बताया कि नई शराब नीति को उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद ही लागू किया गया था. हम इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं.

सिसोदिया ने कहा कि 2021-22 आबकारी नीति को लागू करने से पहले दो बार फाइल को एलजी के पास भेजा गया था. नई नीति को 17 नवंबर से लागू किया जाना था और एलजी ने लॉन्च से ठीक 48 घंटे पहले 15 नवंबर को फाइल वापस कर दी.
उपराज्यपाल के रुख में बदलाव के कारण अनधिकृत क्षेत्रों में दुकानें नहीं खोली जा सकीं. जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. दूसरी ओर, जो दुकानें खोली गई थीं, उन्होंने काफी कमाई की.

इस दौरान उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह भी कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि पूर्व राज्यपाल ने क्या किसी दबाव में यह फैसला किया और क्या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का इससे कोई संबंध है. एलजी के अचानक बदलाव का कारण कुछ निजी कंपनियों या व्यक्तियों को जानबूझकर लाभ पहुंचाना भी हो सकता है.

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