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भारत में गरीब सपने देख सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है: राष्ट्रपति मुर्मू

देश की 15वीं राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू को सीजेआई ने दिलाई शपथ

नई दिल्ली,नवसत्ता: द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को संसद के केंद्रीय कक्ष में देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. भारत के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई. उसके बाद देश के नए राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी गई. 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने सम्बोधन में कहा कि मेरा देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है. उन्होंने कहा कि आज देश का युवा न केवल अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं बल्कि भविष्य के भारत की नींव भी रख रहे हैं. उन्होंने कहा देश के राष्ट्रपति के तौर पर युवाओं को मेरा पूरा सहयोग रहेगा.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि, मुझे राष्ट्रपति के रूप में देश ने एक ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में चुना है जब हम अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं. आज से कुछ दिन बाद ही देश अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे करेगा. ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के 50वें वर्ष का पर्व मना रहा था तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी. और आज आजादी के 75वें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है. मैं देश की ऐसी पहली राष्ट्रपति भी हूँ जिसका जन्म आज़ाद भारत में हुआ है.

उन्होंने कहा कि हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने आजाद हिंदुस्तान के हम नागरिकों से जो अपेक्षाएं की थीं, उनकी पूर्ति के लिए इस अमृतकाल में हमें तेज गति से काम करना है. अपने जीवन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गाँव से शुरू की थी. मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूँ, वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था. लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी.

उन्होंने कहा कि हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी, दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी, भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है. मैं जनजातीय समाज से हूँ, और वार्ड कौन्सिलर से लेकर भारत की राष्ट्रपति बनने तक का अवसर मुझे मिला है. यह लोकतंत्र की जननी भारतवर्ष की महानता है.

साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पद तक पहुँचना, मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है. मेरे लिए यह संतोष की बात है कि जो लोग वर्षों से विकास से वंचित थे- गरीब, दलित, पिछड़े और आदिवासी – मेरे माध्यम से प्रतिनिधित्व पा सकते हैं. मेरे चुनाव में देश के गरीबों का आशीर्वाद है और देश की करोड़ों महिलाओं और बेटियों के सपनों और क्षमताओं को दर्शाता है. मैं सभी देशवासियों, विशेषकर भारत के युवाओं और महिलाओं को विश्वास दिलाता हूं कि इस पद पर काम करते हुए उनका हित मेरे लिए सर्वोपरि रहेगा.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मैं चाहती हूं कि हमारी सभी बहनें व बेटियां अधिक से अधिक सशक्त हों तथा वे देश के हर क्षेत्र में अपना योगदान बढ़ाती रहें. मैं अपने देश के युवाओं से कहना चाहती हूं कि आप न केवल अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं बल्कि भविष्य के भारत की नींव भी रख रहे हैं. देश के राष्ट्रपति के तौर पर मेरा हमेशा आपको पूरा सहयोग रहेगा. उन्होंने कहा, भारत ने भी दुनिया की मदद की. आज दुनियाभर भारत को नए विश्वास की नजर से देख रही है.

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