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UP ELECTION : पिछड़े बनाम अगड़े में सिमटती जा रही यूपी की जंग

UP ELECTION-AGDE BANAM PICHHRE
  • नीरज श्रीवास्तव

लखनऊ, नवसत्ताः UP ELECTION : यूपी में चौबीस घण्टे के भीतर दो-दो कैबिनेट मंत्रियों के इस्तीफे ने योगी सरकार को झटका दिया ही है इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी जंग पिछड़े बनाम अगड़ेे में सिमटती जा रही है। यह मात्र संयोग नहीं है कि पिछड़े वर्ग से आने वाले दोनो मंत्रियों ने अपने इस्तीफे में पिछड़ों के प्रति उपेक्षात्मक रवैये की ही बातें लिखी हैं। दोनो नेता सपा में शामिल होंगे। ऐसे में भाजपा के लिए आने वाले समय में कड़ी चुनौती मिलती नजर आ रही है।

UP ELECTION : योगी सरकार को लग रहे झटके

प्रदेश में चुनाव आचार सहिंता लगते ही योगी सरकार को एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। अब तक भाजपा के कुल नौ विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, बृजेश प्रजापति, रोशन लाल वर्मा, विनय शाक्य, राकेश वर्मा, माधुरी वर्मा, जय चौबे और आरके शर्मा शामिल हैं। जल्द ही कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह सैनी के भी पार्टी छोड़ने की चर्चा है।

अब तक भाजपा के कुल नौ विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। इनमें स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, बृजेश प्रजापति, रोशन लाल वर्मा, विनय शाक्य, राकेश वर्मा, माधुरी वर्मा, जय चौबे और आरके शर्मा शामिल हैं। जल्द ही कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह सैनी के भी पार्टी छोड़ने की चर्चा है।

भाजपा को पूर्वांचल में हो सकती है परेशानी

चुनाव से ठीक पहले दारा सिंह चौहान के पार्टी छोड़ने से भाजपा को पूर्वांचल में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि दारा सिंह चौहान ने 2 फरवरी 2015 को भाजपा ज्वाइन की थी। उससे पहले वो मायावती की बहुजन समाज पार्टी में थे। चौहान राज्य सभा और लोकसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें भाजपा के ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया था। अभी तक गैर यादव मतों को अपनी तरफ खींचने में लगी भाजपा को पहले स्वामी प्रसाद मौर्य और अब दारा सिंह चौहान जैसे पिछड़े समाज के नेताओं के झटके से चुनाव में खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सपा को होगा UP ELECTION में फायदा

वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव जिस तरह गैर यादव पिछड़ी जातियों को अपने पाले में लाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पूर्वाचंल में ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा हो या कृष्णा पटेल का अपना दल इन पार्टियों का जनाधार सपा से मिलकर अखिलेश के पिछड़ों में इंकलाब के नारे को सार्थक करता दिख रहा है।

गौरतलब है कि योगी सरकार पर विपक्षी दल शुरू से ही एक जाति विशेष को वरीयता दिये जाने को लेकर लगातार हमलावर रहा है। भाजपा नेतृत्व भी इस बात को समझता है कि उसकी जीत तभी है जब प्रदेश में जातीय गोलबंदी न हो और चुनाव धर्म के आधार पर हों। इसीलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव को 80 बनाम 20 के बीच लड़ाई होने की बात कही थी। परन्तु वास्तविकता में यह 85 बनाम 15 यानी पिछड़ा बनाम अगड़ा की लड़ाई में तब्दील होता जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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