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बिरसा मुंडा संग्रहालय का उद्घाटन कर बोले पीएम मोदी, जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम देशवासियों को समर्पित

आदिवासी परंपराओं और उनकी वीरता की गाथाओं को भव्य पहचान दी जाएगी

जल्द ही नौ और राज्यों में आदिवासी म्यूजियम की स्थापना होगी

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा

रांची,नवसत्ता : झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रांची में बिरसा मुंडा संग्रहालय का उद्घाटन किया. पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि आज उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही झारखंड अस्तित्व में आया था. उन्होंने ही अलग जनजातीय मामलों का मंत्रालय बनाया था और जनजातीय हितों को राष्ट्र की नीतियों से जोड़ा था.

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र ने तय किया है कि आजादी के अमृत काल के दौरान आदिवासी परंपराओं और उनकी वीरता की गाथाओं को और भी भव्य पहचान दी जाएगी. यही वजह है कि ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है कि 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा. इस महत्वपूर्ण अवसर पर जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी म्यूजियम देशवासियों को समर्पित है. पीएम ने कहा कि जो भूमि उनके तप, त्याग की साक्षी बनी हो. वह हमारे लिए एक पवित्र तीर्थ है.

मोदी ने कहा कि- कुछ दिन पहले मैंने हर राज्य में आदिवासी म्यूजियम की स्थापना का आह्वान किया था. मुझे खुशी है कि हर राज्य इस ओर केंद्र सरकार के साथ बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि जल्द ही नौ और राज्यों में आदिवासी म्यूजियम की स्थापना होगी. बहुत जल्द गुजरात के राजपीपला, आंध्र प्रदेश के लम्बासिंगी, छत्तीसगढ़ के रायपुर, केरल के कोझीकोड, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, तेलंगाना के हैदराबाद, मणिपुर के टमिंगलोंग, मिजोरम के कैल्सि में, गोवा के पोंडा में इन संग्राहलयों को हम साकार रूप लेते हुए देखेंगे.

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने समाज के लिए जीवन दिया. अपनी संस्कृति अपने देश के लिए प्राणों का परित्याग किया. इसलिए वे आज भी हमारी आस्था में, हमारी भावनाओं में उपस्थित हैं. इसलिए हम जब भी देश के विकास में आदिवासी समाज को देखते हैं तो हमें भगवान बिरसा मुंडा का चेहरा दिखाई देता है.

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, भारत की सत्ता, भारत के लिए निर्णय लेने की अधिकार-शक्ति भारत के लोगों के पास आए, ये स्वाधीनता संग्राम का एक स्वाभाविक लक्ष्य था. लेकिन साथ ही, ‘धरती आबा’ की लड़ाई उस सोच के खिलाफ भी थी जो भारत की, आदिवासी समाज की पहचान को मिटाना चाहती थी. उन्होंने कहा, आधुनिकता के नाम पर विविधता पर हमला, प्राचीन पहचान और प्रकृति से छेड़छाड़, भगवान बिरसा जानते थे कि ये समाज के कल्याण का रास्ता नहीं है. वो आधुनिक शिक्षा के पक्षधर थे, वो बदलावों की वकालत करते थे, उन्होंने अपने ही समाज की कुरीतियों के, कमियों के खिलाफ बोलने का साहस दिखाया.

पीएम ने कहा, भगवान बिरसा के नेतृत्व में मुंडा आंदोलन हो, या फिर संथाल संग्राम और खासी संग्राम हो, पूर्वोत्तर में अहोम संग्राम हो या छोटा नागपुर क्षेत्र में कोल संग्राम. भारत के आदिवासी बेटे बेटियों ने अंग्रेजी सत्ता को हर कालखंड में चुनौती दी. हम सभी के लिए भगवान बिरसा एक व्यक्ति नहीं एक परंपरा हैं. सदियों से वे भारत की आत्मा का हिस्सा हैं.

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