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लखीमपुर खीरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हत्या के मामले में आरोपी से अलग व्यवहार क्यों हो रहा है : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली,नवसत्ता : लखीमपुर खीरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है सुप्रीम कोर्ट ने कहा “क्या आरोपी आम आदमी होता तो उसे इतनी छूट मिलती. एसआईटी में सिर्फ स्थानीय अधिकारियों को रखा गया है. यह मामला ऐसा नहीं जिसे सीबीआई को सौंपना भी सही नहीं रहेगा. हमें कोई और तरीका देखना होगा. डीजीपी सबूतों को सुरक्षित रखें. 20 अक्टूबर को सुनवाई.”

इस दौरान सीजेआई ने कहा, हम जिम्मेदार सरकार और जिम्मेदार पुलिस देखना चाहते हैं. सभी मामलों के आरोपियों के साथ एक तरह का ही व्यवहार होना चाहिए. सीजेआई ने कहा कि उदाहरण के तौर पर 302 यानी हत्या का मामला दर्ज होता है तो ऐसे हालात में पुलिस क्या करती है? हत्या के मामले में आरोपी से अलग व्यवहार क्यों हो रहा है?

इसके अलावा सीजेआई ने कहा कि सौ से ज्यादा मेल हमारे पास आए हैं. हम यूपी को पहले बोलने का मौका देंगे. यूपी की एडीशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने कहा कि यूपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे पेश होंगे. साल्वे किसी दूसरी कोर्ट में व्यस्त, गरिमा प्रसाद कि गुजारिश पर सीजेआई ने कुछ देर के लिए मामला टाल दिया है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से मामले की स्टेटस रिपोर्ट आज कोर्ट के सामने पेश की गई. शीर्ष अदालत ने 3 अक्टूबर को हुई लखीमपुर हिंसा को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया था और राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.

लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं, चाहे वह कोई भी हो
सीएम योगी ने कहा कि ये घटना दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार इसकी तह तक जा रही है. लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं है. चाहे वह कोई भी हो कानून सबके लिए समान है, कानून सबके साथ समान रूप से व्यवहार भी करेगा. लेकिन हाईकोर्ट की ये रूलिंग भी है कि गिरफ्तारी से पहले पर्याप्त साक्ष्य भी होने चाहिए. हम किसी के खिलाफ सिर्फ आरोप पर गिरफ्तारी नहीं करेंगे. हमने साक्ष्य मिलने के बाद सभी की गिरफ्तारी की है चाहे वह बीजेपी का विधायक हो या विपक्ष का नेता.

कांग्रेस सहित विपक्ष के तमाम नेताओं का आरोप है कि उन्हें लखीमपुर जाने से रोका गया, क्योंकि ये कुछ गलत कर रहे थे. सीएम योगी ने कहा कि हमने तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज की. हमारे विपक्ष के जो लोग थे ये कोई सद्भावना के दूत नहीं थे. एक बार पूरी जांच हो जाने दीजिए, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.

वहीं कोर्ट ने एक निजी चैनल की रिपोर्टिंग पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ये जिम्मेदार मीडिया को नही करना चाहिए. साल्वे ने कहा कि इस मामले में चैनल के खिलाफ कोर्ट की अवमानना के तहत करवाई होनी चाहिए.

गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी. इनमें चार किसान, एक पत्रकार, दो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और एक ड्राइवर का नाम शामिल है. लखीमपुर खीरी में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी. इनमें चार किसान, एक पत्रकार, दो भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और एक ड्राइवर का नाम शामिल है.

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