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ना पैसा ना मजबूत स्वास्थ्य सेवा लेकिन काबू में कोरोना

हनोई-कोरोना वायरस की महामारी चीन से 10 हजार किलोमीटर दूर अमीर यूरोपीय देशों को निशाना बना रही है लेकिन वहीं पास में मौजूद वियतनाम मोटे तौर पर इससे अछूता रह गया है.

दुनिया भर के कोरोना वायरस पीड़ितों का सबसे बड़ा हिस्सा अब यूरोप में हैं लेकिन चीन के साथ 1100 किलोमीटर लंबी साझी सीमा वाले वियतनाम में महज 179 लोग संक्रमित हैं और अब तक किसी की मौत नहीं हुई है. बहुत सावधानी से इन नंबरों को देखने के बाद भी एक बात तो बिल्कुल साफ है कि वियतनाम कोरोना वायरस से लड़ाई में अब तक सफल रहा है.

जनवरी के आखिर में नए साल के जश्न के दौरान ही वियतनाम की सरकार ने कोरोना वायर के खिलाफ “जंग छेड़ने का एलान” कर दिया. हालांकि उस वक्त तक कोरोना का संक्रमण केवल चीन में ही था. प्रीमियर एनगुएऩ शुआन फुक ने वियतनाम की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी की एक बैठक के दौरान कहा कि कोरोना वायरस के देश तक पहुंचने में देर नहीं होगी. फुक ने कहा, “महामारी से जंग का मतलब है, दुश्मन से जंग.”

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हर मोर्चे पर जंग

यह जंग हालांकि सरकारी पैसे और स्वास्थ्य सेवाओं के दम पर लड़ी जानी थी और दोनों ही चीजों में देश की हालत अच्छी नहीं थी. वियतनाम के पास दक्षिण कोरिया की तरह बड़े पैमाने पर लोगों का परीक्षण करने की क्षमता नहीं है. देश का स्वास्थ्य तंत्र सीमित है. हो ची मिन्ह शहर के मेयर एन्गुएन थान्ह फोंग ने बताया कि 80 लाख लोगों की आबादी वाले शहर के अस्पतालों में महज 900 इंटेंसिव केयर बेड हैं. शहर में अगर महामारी फैली तो उसे संभालना मुश्किल होगा.

कोरोना वायरस से लड़ाई के लिए वियतनाम ने क्वारंटीन की कठोर नीति बनाई और हर उस शख्स को अलग थलग करना शुरू किया जो वायरस के संपर्क में आया हो. यह उपाय तभी लागू कर दिए गए जब चीन में महामारी पूरी तरह से नहीं फैली थी. चीन में महामारी को फैलने से रोकने के लिए पूरे वुहान की तालाबंदी का आखिरी उपाय इस्तेमाल करना पड़ा.

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उदाहरण के लिए 12 फरवरी को वियतनाम ने हनोई के पास एक पूरे टाउन को तीन हफ्ते के लिए क्वारंटीन कर दिया. इस वक्त तक पूरे देश में कोविड 19 के महज 10 मामलों की पुष्टि हुई थी. अधिकारियों ने व्यापक तौर पर बड़ी सतर्कता से ऐसे सभी लोगों की सूची बनाई जिनके वायरस के संपर्क में आने की आशंका हो.

जर्मनी जैसे पश्चिमी देशों ने सिर्फ उन लोगों की सूची बनाई है जो या तो संक्रमित हैं या फिर सीधे संक्रमित लोगों के संपर्क में हैं. वियतनाम ने दूसरे, तीसरे, और चौथे स्तर पर भी संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का नाम दर्ज किया. इन सारे लोगों पर अपनी गतिविधियां और संपर्क को बंद करने की पाबंदी लगाई गई.

इसके अलावा बहुत शुरूआत से जोखिम वाले इलाके से आने वाले लोगों को 14 दिन के क्वारंटीन में डाला गया. फरवरी की शुरुआत से ही सारे स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए.

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पूरे वियनाम की निगरानी

कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए दवाओं और तकनीक पर निर्भर करने की बजाय. वियतनाम ने देश के सुदृढ़ सुरक्षा तंत्र को बड़े पैमाने पर लोगों की निगरानी में तैनात कर दिया. इसमें देश की सेना ने भी मदद की जो यहां आमतौर पर सम्मान की नजरों से देखी जाती है.

यहां सुरक्षा अधिकारी या फिर कम्युनिस्ट पार्टी के जासूस हर गली चौराहे पर और हर गांव में मौजूद रहते हैं. इसके बाद सेना ने भी अपने जवानों और साजो सामान को कोरोना वायरस से जंग में उतार दिया. इस मजबूत निगरानी के दम पर वियतनाम ने किसी भी नागरिक को अपने तंत्र और नियमों के दायरे के बाहर जाने से रोक दिया.

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हालांकि इसका बुरा पक्ष यह है कि जो लोग कोविड 19 के शिकार हुए उन्हें उनके समुदाय और सोशल मीडिया ने पूरी तरह बाहर कर दिया गया. एक महिला का मामला सामने आया है जो यूरोप की यात्रा करने के बाद हनोई वायरस के साथ पहुंची थी. नियमों का उल्लंघन करने के लिए सोशल मीडिया पर उसे बहुत अपमानित किया गया.

यह एक अलग मामला भी था क्योंकि उसके वापस आने से पहले वियतनाम में कोविड 19 के 16 मामले हुए थे और वो सब ठीक हो चुके थे. उस महिला को वियतनाम में दोबारा वायरस पहुंचाने का जिम्मेदार माना जाता है. इस तरह अपमानित किए जाने के बाद लोगों पर यह दबाव बढ़ गया है कि हर हाल में प्रशासन के नियमों का पालन करें.

जंग का नारा

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वियतनाम कोरोना से लड़ाई को एक तरह की जंग का नाम दे रहा है. प्रीमियर ने कहा, “हर कारोबार, हर नागरिक, हर घर को महामारी से लड़ने के लिए दुर्ग बनना होगा.”

इस नारे ने हर नागरिक को इस लड़ाई से जोड़ दिया है और वह इसके खिलाफ एक साथ खड़े होकर कठिन दौर से लड़ने की क्षमता पर सम्मान का अनुभव कर रहे हैं.

सरकार नियंत्रित मीडिया ने भी सूचना देने का एक बड़ा अभियान चलाया है. स्वास्थ्य मंत्रालय का एक प्रायोजित गीत यूट्यूब पर वायरल हो रह

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