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ब्लैक लिस्ट होना था मिला करोड़ों का ठेका,नाराज मंत्री ने दिये जांच के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकार कैसे काम कर रही है उसकी एक बानगी प्रदेश का आयुष विभाग है जहां मंत्री ने जिस कम्पनी को काली सूची में डालने का निर्देष दिया था उसे ही करोड़ों का ठेका दे दिया गया। विभाग के अधिकारियों के इस कारनामें पर नाराज मंत्री ने अब इस मामले में जांच बिठाते हुए कहा है ि कइस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश के आयुष विभाग में वहां के कुछ अधिकारियों की मनमानी सिर चढ़कर बोल रही है। विभाग में राज्य आयुष मिशन के तहत होने वाली होमियोपैथिक दवाओं की आपूर्ति में उस कम्पनी को दवा आपूर्ति का बड़ा ठेका देने की तैयारी है जो पहले से ही विभाग में तमाम वित्तीय एवं प्रशासनिक गड़बड़ियों का आरोपी है। इस कम्पनी को पिछले वर्षों में होमियोपैथिक दवाओं की आपूर्ति का बड़ा ठेका दिया गया था। शर्त यह थी कि ठेका अनुबन्ध के तहत दवाओं की आपूर्ति 60 दिनों के भीतर कम्पनी हर हाल मे कर देगी लेकिन कम्पनी ने 11 महीने में भी दवाओं की आपूर्ति पूरी नहीं की। इसके बावजूद विभागीय आधिकारियों ने सारे मानकों को ताक पर रखकर पिछले वर्ष मई माह में 16 करोड़ रुपये के क्रय आदेश दे दिए। इस क्रय आदेश में भी जो शर्ते दी गई कम्पनी ने उसे भी पूरा नहीं किया। क्रय अनुबन्ध में शर्त थी कि फर्म 60 दिनों के भीतर दवा की आपूर्ति करेगी और हर दवा पर क्यूआर कोड अंकित करेगी ताकि दवाइयों का दुरुपयोग न हो और वह खुले बाजारों में न बिक सके। कम्पनी ने उस आर्डर के तहत दो महीने के बदले पांच महीने बाद बीते अक्टूबर में कुछ जिलों में नाम मात्र की दवा आपूर्ति की वह भी क्यूआर कोड के बिना। उसके आगे दवाओं की सप्लाई फिर से ठप हो गई। बीते सात जनवरी को विभाग में आए नए सचिव ने तकनीकी विशेषज्ञों के निर्णयों को पूरी तरह से पलटते हुए आरोपित कम्पनी को दवा आपूर्ति के लिए एक माह का अतिरिक्त समय देने का आदेश जारी कर दिया। सूत्र बताते हैं कि प्रयास यह भी किया जा रहा है कि सम्बन्धित कम्पनी द्वारा बिना क्यूआर कोड के आपूर्ति की गई दवाओं को अपवाद मानकर स्वीकार कर लिया जाए। मुख्यमंत्री का आदेश भी ठेंगे पर इस पूरे प्रकारण से जुड़े तमाम मामलों की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय को भी गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने तत्कालीन आयुष सचिव मुकेश मेश्राम को प्रकरण की जांच कर आख्या भेजने के निर्देश दिए थे। तत्कालीन आयुष सचिव मे आयुष मिशन के वित्त प्रबन्धक को इसकी जांच सौंपी और मामला मुख्यमंत्री के संदर्भ का होने हवाला देकर अतिशीघ्र जांच आख्या प्रेषित करने को कहा लेकिन आठ माह से अधिक बीतने के बावजूद वित्त प्रबन्धक ने अपनी कोई भी जांच रिपोर्ट शासन को नहीं सौंपी है। आरोपी कम्पनी को काली सूची में डालने का निर्णय भी ठंडे बस्ते में बीते अक्टूबर माह में विभाग की समीक्षा बैठक में यह तय हुआ था कि दवा आपूर्ति में हीलाहवाली व अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के मद्देनजर मिशन निदेशक गहराई से पूरे प्रकरण की जांच कर प्रमुख सचिव के माध्यम से अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। इसके बाद एक नवम्बर को हुई समीक्षा बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद तय किया गया कि उक्त फर्म की प्रतिभूति राशि जब्त कर इसे काली सूची में डाल दिया जाए। साथ ही निविदा में दूसरे नम्बर पर आई कम्पनी से दवाइयां क्रय कर मूल्यों के अन्तर को प्रथम कम्पनी के जब्त प्रतिभूति राशि से प्रतिपूर्ति कर ली जाए। इस निर्णय के आधार पर मिशन की ओर से आरोपी कम्पनी को बीते 29 नवम्बर को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। बीते 28 दिसम्बर को राज्य आयुष मिशन की क्रय समिति के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा सम्बन्धित कम्पनी को काली सूची में डालने व उसकी प्रतिभूति राशि जब्त करने से लेकर एल फार्म-2 से रिस्क परचेज के तहत औषधियों के क्रय करने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय तत्कालीन प्रमुख सचिव व अध्यक्ष राज्य आयुष सोसायटी को इस साल तीन जनवरी को अनोमोदन के लिए भेज दिया गया। नोटिस के जवाब में आरोपी कम्पनी ने कहा हिन्दी नहीं आती फर्म ने मिशन के उस नोटिस का जवाब देने से यह कहकर इन्कार कर दिया कि उनके यहां हिन्दी नहीं चलती लिहाजा उससे अंग्रेजी में पत्राचार किया जाए। ऐसा कम्पनी ने तब लिखा जबकि पूर्व की निविदाओं से लेकर अनुबन्ध पत्र एवं सभी क्रय आदेश तक का पत्राचार यह कम्पनी हिन्दी में करती रही है। नाराज मंत्री बोले, कड़ी कार्रवाई होगी इस मामले के खुलासे के बाद आयुष विभाग के मंत्री धर्म सिंह सैनी ने प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए आज कहा कि उन्होंने जांच के आदेश दे दिये हैं। उन्होंने कहा कि इस बात की जांच की जाएगी कि आखिर जिस कंपनी को काली सूची में डालने के निर्देश दिये गये थे उसे किसके आदेश से दवा खरीद के आदेश दिये गये। मंत्री ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रव

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